पापोहं पापकर्माहं मंत्र व श्लोक अर्थ सहित
Papoham Papakarmaham Vishnu Mantra
सनातन धर्म में भगवान शिव और भगवान विष्णु करुणा, संरक्षण और मोक्ष के परम प्रतीक माने गए हैं।
जहाँ भगवान शिव भक्त के पापों को भस्म कर उसे आत्मिक शुद्धि की ओर ले जाते हैं, वहीं भगवान विष्णु भक्त की रक्षा कर उसे धर्म, मर्यादा और सद्मार्ग पर स्थिर रखते हैं।
भक्ति परंपरा में कुछ मंत्र ऐसे हैं जो केवल जप नहीं, बल्कि आत्मस्वीकार और पूर्ण शरणागति का भाव प्रकट करते हैं।
“पापोहं पापकर्माहं” ऐसा ही एक मंत्र है, जिसमें भक्त अपने दोषों को स्वीकार कर अहंकार त्यागता है और प्रभु की करुणा की याचना करता है।
तो आइए जानते हैं पापोहं पापकर्माहं मंत्र के बारे में –
और समझते हैं कि Papoham Papakarmaham Vishnu Mantra और Papoham Papakarmaham Shiv Mantra क्या हैं, इनका अर्थ क्या है?
पापोहं पापकर्माहें पापात्मा पापसंभवः।
त्राहि मां पुण्डरीकाक्षं सर्व पाप हरो हरी॥
हिंदी अर्थ
हे प्रभु!
मैं पापी हूँ, मेरे कर्म पाप से भरे हैं,
मेरा स्वभाव भी पाप से प्रभावित है
और मेरा जन्म व जीवन भी पापों के कारण ही दूषित हुआ है।
हे कमलनयन प्रभु (भगवान विष्णु/हरि)!
मुझ पर कृपा कीजिए,
मुझे बचाइए और
मेरे सभी पापों को नष्ट कर दीजिए।
Papoham Papakarmaham Shiv Mantra
पापोहं पाप कर्माहं पापात्मा पाप संभवः।
त्राहि मां पार्वतीनाथ सर्व पापहरो हर।।
हिंदी अर्थ
इस मंत्र का अर्थ है, “मैं पापी हूँ, मेरे कर्म पापी हैं, मेरी आत्मा पापी है, मैं पाप का जन्मदाता हूँ। हे पार्वतीनाथ, मुझे बचाओ, हे सर्व पापों को हरने वाले!”
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